निबंध लेखन : आजकल प्राय:बच्चे बड़ों को उचित सम्मान नहीं देते हैं । क्या यह उचित है? कारणों को स्पष्ट करते हुए यह भी लिखिए कि माता-पिता के प्रति संतान के क्या-क्या कर्तव्य होते हैं।
आज के युग को यदि भौतिकवादी युग की संज्ञा दी जाए तो यह गलत नहीं होगा । हमारा देश भारत उसके विचारों संस्कारों और नैतिक मूल्यों के लिए विश्व विख्यात है। आदिकाल से संतान अपने माता पिता को भगवान समान मानते थे। भगवान श्री राम भी अपने पिता दशरथ के एक आदेश पर अपने राज्य लोभ को त्याग कर बनवास चले गए थे।
किंतु इसे इस पीढ़ी के संस्कारों की कमजोरी का है या पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव कि आजकल के बच्चे माता पिता को वह सम्मान नहीं देते जिसके वह हकदार है। आजकल बच्चों को बड़ों के लिए मारना तो दूर डाटना भी मां-बाप के लिए गुना समान हो गया है।
एक समय था जब बच्चे गलती करने पर माता-पिता की मार भी बिना शिकायत किए से लेते थे। पर आजकल मानना तो दूर माता-पिता बच्चों को डांटने में से भी डरते हैं कि बच्चा कुछ करना ने। हाल ही में तीसरी कक्षा के छात्र ने होमवर्क ना करने पर मां द्वारा दाते जाने पर आत्महत्या कर ली। यही हमारे संस्कारों की नींव है जिसकी सराहना सारा विश्व करता है।
अगर देखा जाए तो कहीं ना कहीं अभिभावक भी इसके लिए जिम्मेदार है। पहले माता-पिता अपने बच्चों में मूल्य की नींव डालते थे इसी कारण मां को बच्चे का प्रथम गुरु कहा जाता है। * आजकल माता-पिता अपने बच्चों को नौकरों के भरोसे छोड़ जाते हैं बच्चा माता-पिता के आचार से ही सीखता है।
जब बच्चा अपने पिता को घर पर होते हुए भी टेलीफोन पर झूठ बोलते हुए देखेगा कि वह घर पर नहीं है तो वह सीखेगा कि समय आने पर झूठ का सहारा लेना गलत बात नहीं है।
जब वह अपनी मम्मी को कपड़े की दुकान पर पूरे पैसे देते हुए और सब्जी वाली के साथ दो रुपए के लिए किसी करते देखेगा तो वह सीखेगा कि गरीबों का शोषण करने में कोई बुराई नहीं है।
अतः हम कह सकते हैं कि बच्चों में अच्छी शिक्षा विचारों रचना की नींद आने वाले प्रथम शिक्षक माता-पिता होते हैं। माता पिता का सम्मान करना कहना मानो और उनकी इच्छाओं को पूरा करना संतान का कर्तव्य है उनको ध्यान रखना चाहिए कि जिस प्रकार माता-पिता उसकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए जीत और मेहनत करते हैं उसी प्रकार माता-पिता के प्रति भी उनके कर्तव्य जिनका उन्हें निर्वाह करना चाहिए।

Comments
Post a Comment